Wednesday, 1 March 2017

इतिहास के इस Topic से जरुर आते हैं सवाल, जरुर तैयार कर लें

Ancient History Notes in Hindi. भारतीय इतिहास  (प्राचीन भारतीय इतिहास)


 भारत के प्राचीन इतिहास को समझने के लिए सबसे पहले हम इसे तीन कालखंडों में बांटते हैं.
1-प्रागैतिहासिक काल
2-आद्य ऐतिहासिक काल
3-पूर्ण ऐतिहासिक काल

Ø  प्रागैतिहासिक काल में उन संस्कृतियों का अध्ययन करते हैं जिसका संबंध पाषाण संस्कृतियों से है. (इस काल में मिलने वाली चीजें पत्थरों से बनी हैं).
Ø  आद्य ऐतिहासिक काल में हड़प्पा सभ्यता और ऋग्वैदिक सभ्यता आती हैं.
Ø  पूर्ण ऐतिहासिक काल की शुरुआत मौर्य काल से माना जाता है.


प्राचीन भारत के इतिहास को समझने के नजरिये से इस तरह से बांट सकते हैं-
1-प्रागैतिहासिक काल
2-सिन्धु घाटी की सभ्यता
3-वैदिक संस्कृति
4-संगम काल
5-प्राचीन भारतीय धर्म और दर्शन
6-मौर्य साम्राज्य
7- मौर्योत्तर काल (शुंग वंश, भारत पर विदेशी आक्रमण, पहलव वंश व कुषाण वंश)
8-गुप्तकाल
9-गुप्तोत्तर काल
10-राजपूत काल (भारतीय उप महाद्वीप पर अरबों का अक्रमण और भारत पर तुर्क आक्रमण)

पुरातत्व और प्रागैतिहासिक काल

मानव सभ्यता के नजरिये से प्रागैतिहासिक (Pre-History Age) को सबसे आरंभिक काल माना जाता है. इतिहास के इस कालखंड को अध्ययन के लिहाज से तीन भागों में बांटा गया है.
1-पुरा पाषाण काल (Palaeolithic Age)
2-मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age)
3- नव पाषाण काल (Neolithic Age)

  • नवपाषाण काल के अंतिम चरण में इंसान ने धातुओं का प्रयोग शुरु किया. इंसान ने जिस धातु का सबसे पहले इस्तेमाल शुरु किया वो तांबा था.
  • जिस काल में इंसान ने पत्थर के साथ-साथ तांबे के औजारों का इस्तेमाल किया उसे ताम्र-प्रस्तर कहा जाता है. इसका मतलब है वो काल जिसमें पत्थर व तांबे के उपयोग की जानकारी मिलती है.
इस Topic से परीक्षा में आए हुए प्रश्न

  • कैलिग्राफी सुलेखन को कहते हैं. (Stenographer Gread-C-1999)
  • पुरालेख विद्या का मतलब शिलालेख के अध्ययन से लिया जाता है. (C.P.O Exam-2003)
  • प्रस्तर युग में कुत्ता एक घरेलू पशु था. (Stenographer Gread-C Exam-1998)
  • पुरा पाषाण काल को मानव अस्तित्व का प्रारंभिक काल माना जाता है. (MTS EXAM-2013)
Point wise Important Facts:-


  • पुरालेखशास्त्र को एपिग्राफी कहते हैं, इसके अंतर्गत शिलालेख का अध्ययन करते  हैं.
  • पुरालिपिशास्त्र को पेलियोग्राफी कहते हैं इसके अंतर्गत प्राचीन लिपि का अध्ययन किया जाता है.
  • सुलेखन की कला को कैलिग्राफी कहते हैं. मुहम्मद बिन तुगलक इतिहास में सुदंर हस्तलेख के लिए प्रसिद्ध है.
  • निम्म पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थलों में कश्मीर, बेलन घाटी के अंतर्गत मीरजापुर (Uttar Pradesh), भीमबेटका (Madhya Pradesh).
  • मध्यपुरा पाषाण काल के मुख्य स्थल हैं- मीरजापुर (उत्तर प्रदेश), नेवासा (महाराष्ट्र), ओडिशा.
  • मध्यपुरा पाषाण काल को Flake Culture भी कहते हैं.
  • सबसे पुरानी चित्रकारी के प्रमाण उच्च पुरा पाषाण काल के दौरान भीमबेटका से मिलते हैं. गुफा शैल चित्रकारी के लिए भीमबेटका मशहूर है.
  • मध्य पाषाण काल में आदमगढ़ और बागोर से पशुपालन के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं.
  • विश्व और भारतीय उप-महाद्वीप में चावल का सबसे प्राचीनतम प्रमाण नव पाषाणकाल (6000 ईसा पूर्व) में कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश) से मिलता है. 
  • कृषि का सर्वप्रथम साक्ष्य मेहरमढ़ से मिलता है.
  • सराय नाहर राय से मध्य पाषाणिक काल में पशुपालन के साक्ष्य मिलते हैं.
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