Wednesday, 5 October 2016

परीक्षा में आते हुए सवाल नहीं होगे गलत, अपनाइये ये प्रैक्टिकल उपाय

दोस्तों जैसा की हमने पहले ही आपको बताया है कि पढ़ाई एक कला है, एक साधना है. प्रैक्टिस से आप इसमें पारंगत हो सकते हैं.  दुनिया का कोई ऐसा डॉक्टर नहीं जो आपको नीली-पीली, हरी-गुलाबी रंग की टैबलेट और सीरप देकर ये दावा करें कि चार खुराक दवा खाकर पढ़ाई में उस्ताद हो जाएंगे, लिहाजा आप किसी भी क्लास में हो या फिर किसी कंपटिशन की तैयारी कर रहे हों आप सिर्फ और सिर्फ प्रैक्टिस के जरिए इसमें महारथ हासिल कर सकते हैं.



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आपकी सहुलित के लिए हमने एक सीरिज शुरु की है जिसमें हम आपको पढ़ाई की कला के जुड़े कुछ प्रैक्टिकल टिप्स दे रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किसी भी चीज को सीखने और उसे याद रखने के लिए आप क्या  प्रैक्टिकल उपाय अपनाएं.

दोस्तों आपने कभी बाइक या फिर कोई गाड़ी चलाई है. आपने ध्यान दिया होगा कि स्पीड मीटर पर इकोनॉमी का एक निशान बना होता है. इस निशान का मतलब होता है कि अगर आपके स्पीड का कांटा इस इकोनॉमी निशान पर रहेगा तो आपकी गाड़ी अच्छा एवरेज देगी और उसके इंजन की लाइफ भी अच्छी रहेगी. अब इसी फॉर्मूले को आप अपनी पढ़ाई पर लागू करें. जब भी कोई किताब पढ़ते हैं तो आपकी पढ़ने की स्पीड न तो बहुत धीमी होनी चाहिए और ना ही बहुत तेज. स्पीड अच्छी होनी चाहिए. अगर पढ़ने की स्पीड़ बहुत तेज हुई तो एक तो ज्यादा एनर्जी खर्च होगी और दूसरा दुर्घटना का अंदेशा हमेशा बन रहेगा. उसी तरह से स्पीड अगर बहुत धीमी भी रही तो भी एनर्जी ज्यादा खर्च होगी और आप पढ़ाई में बहुत  पीछे हो जाएंगे.



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अब बात करते हैं पढ़ने के दौरान सही स्पीड की. अगर आपकी स्पीड अच्छी है (न बहुत तेज, न बहुत धीमे) तो इसके तीन फायदे होंगे:-
एकाग्रता (Concentration) बनी रहेगी. 
दिमाग इधर-उधर की बातों में नहीं भटकेगा.
विषय (Subject) की समझ बढ़ेगी.
अगर आप पढ़ने की स्पीड अच्छी रखना चाहते हैं तो एक प्रैक्टिल उपाय अपनाइए. अंगूठे की बाजू वाली उंगली को उस लाइन पर चलाना शुरु कीजिए जिसे आप पढ़ रहे हैं. धीरे-धीरे आपकी आंखे इसकी अभ्यस्त हो जाएंगी और पढ़ने की स्पीड भी बढ़ जाएगी. आप देखेंगे की प्रैक्टिस से कुछ दिन बाद आप बिना उंगली रखे भी तेजी से पढ़ा सीख जाएंगे.



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एक बात आपको हमेशा याद रखनी चाहिए. बोलकर कभी भी नहीं पढ़ना चाहिए. इससे आप अनावश्यक रूप से एनर्जी खोते हैं. हां आप बोलने की बजाय उसे मन में दुहरा सकते हैं. सबसे अच्छा तरीका तो ये है कि आप जो भी पढ़े, पढ़ने से उठने से उसे 5 से 10 मिनट का वक्त निकालकर कॉपी पर लिख लें. ये सार ही आपका नोट्स होगा और आप देखेंगे की लिखते समय विषय को लेकर आपकी समझ अपने आप विकसती होगी.



जो लोग ये  बोलते हैं कि वो पढ़ते तो बहुत हैं लेकिन एक्जाम में लिख नहीं पाते हैं उनके लिए ये आजमाया हुआ फॉर्मूला रामबाण हैं. अगर आप सिविल सर्विसेज, एसएससी, बैंक जैसी परीक्षा दे रहे हैं, जहां आपको मेंस भी देना होता, उसके लिए भी आप इस फॉर्मूले को जरुर अपनाएं क्योंकि पढ़ी हुई बातें अक्सर हम भूल जाते हैं लेकिन लिखी हुई चीजें लंबे समय तक याद रहती है, ऐसा इसलिए होता क्योंकि जब आप पढ़ने के बाद किताब बंद करके उसे अपनी भाषा में लिखते हैं तो दिमाग उन तथ्यों को एनालिसिस करता है. अपने लॉजिक लगता है तथ्यों को वर्तमान के नए-नए उदाहरण से जोड़ता है. मसलन अगर आप राष्ट्रपति शासन के बारे में पढ़ रहे हैं और किताब पढ़ने के बाद जब उसे अपनी भाषा में लिखने बैठेंगे तो सबसे पहले आपका दिमाग अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड की और भागेगा. फिर देखिएगा अपने आप वो खुद किताबों के तथ्यों को एनालिसिस करने लगेगा. और इस बात को दिमाग हमेशा याद रखेगा. जब परीक्षा में राष्ट्रपति शासन से जुड़ा सवाल आएगा तो फिर  आप उत्तर उत्तराखंड से ही शुरु होगा क्योंकि दिमाग ने उसे इसी  से जोड़ते हुए याद किया है. जब आप अपने अंसर को वर्तमान परिपेक्ष से परीक्षा में जोड़कर लिखते हैं तो हमेशा ज्यादा नंबर मिलते हैं. इसलिए जो लोग पढ़ने के बाद लिखते  हैं उनकी समझ दूसरों कही ज्यादा अच्छी होती हैं. यकीन नहीं है तो सिर्फ इस फॉर्मूले को 10 दिन अपनाइए, आप खुद ही फर्क महसूस करने लगेंगे. फर्क नहीं पढ़ेगा तो किसने रोका है फिर से उसी पुराने ढर्रे पर लौट जाइगा. लेकिन यकीन मानिए दूसरों के नोट्स के लिए दर-दर भटकने वालों को इस बीमारी से निजात जरुर मिल जाएगी. एक बार आजमाकर तो देखिए.


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NOTE:-पढाई में अगर नहीं लगता मन तो अपनाएं ये प्रैक्टिकल उपाय... CLICK

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