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    Sunday, 11 September 2016

    IAS/PCS की तैयारी कर रहे हैं तो यह लेख जरुर पढ़ें




    दोस्तों हमारी कोशिश है कि हम आपको फ्री में बेहतरीन गाइडेंस और प्रमाणिक नोट्स उपलब्ध कराएं. इसके लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं. आप भी इस बात को अच्छी तरह से जानते होंगे कि सफल वही होता है जो रणनीति बनाकर आगे बढ़ता है. सिविल सर्विसेज (IAS/PCS) का  किला फतह करना चाहते हैं तो  कुछ खास बातों को ध्यान रखना होगा. ये वहीं खास बातें हैं जो सफलता के लिए सबसे बड़ी बाधा है. इन्हीं बातों को शिवा ठाकुर शिवा जी ने अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया है. 

    हम उनकी वॉल से इस पोस्ट को साभार लेकर आपके सामने पेश कर रहे हैं. क्योंकि शिवा जी का ये पोस्ट पढ़ने के बाद आपको कई सवालों के उत्तर मिल जाएंगे? क्या महंगी कोचिंग करने से कोई आईएएस  बनता है? क्या कोचिंग किसी को आईएएस बना सकती हैं? कोचिंग करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. वगैरह-वगैरह.

    छोटी-सी अपील-



    आपसे अनुरोध है कि पढ़ने के बाद इस लेख को अपने तक ही सीमित ना रखेंं, नीचे फेसबुक शेयर का बटन दबाकर उन दोस्तों को भी बताएं जो अफसर बनने का सपना लिए जी रहे हैं. आपका एक शेयर किसी के सपने को हकीकत में बदल सकता है. 


    धन्यवाद

    शिवा ठाकुर जी का लेख हू-ब-हू पढ़िए.

    Shiva Thakur Shiva

    -----------#I.a.s के लिये कोचिंग को लेकर जिन छात्रों के ह्रदय में भ्रम पल रहा हैं - की करें या ना करें - वो इस लेख को ज़रूर पढ़े - #shivu -


    सिविल सेवा परीक्षा : कोचिंग करे या न करे?

    सिविल सेवा की तैयारी में लगे अभ्यर्थियों के सामने ये बहुत बार सवाल उठता है की कोचिंग करे या न करे, करे तो किस कोचिंग में जाएँ? हर साल UPSC के रिजल्ट के बाद पेपर-पत्रिकाओं में कोचिंग संस्थाओं के बड़े -बड़े विज्ञापनों की टैग लाइन होती है-” सफलता का पर्याय, इस बार के सफल अभ्यर्थियों में आधे से ज्यादा हमारी कोचिंग से, टॉप 50 और टॉप 100 में हमारे इतने छात्र इत्यादि”. क्या वाकई ऐसा है, क्या कोचिंग सफलता दिलाने में इतने अहम् हैं, क्या कोचिंग के बिना सफलता प्राप्त नही की जा सकती, क्या सारे TOPPERS जिनके बारे में कोचिंग संस्थान दावा करते हैं, उन्होंने उनके यहाँ से कोचिंग की होती है?


    आप खुद देख सकते हैं की हर साल के रिजल्ट के बाद टॉप 50 -100 की सूची में आने वाले अधिकांश छात्रों की सफलता के दावे आपको के लिए कम-से-कम 10 -15 कोचिंग संस्थान सामने आते हैं. होता है की अपनी तैयारी के क्रम में लड़के भटकते हुए कई कोचिंग्स को try करते हैं, सो अगर आप एक बार किसी कोचिंग में गए और आपने अपनी फोटो के साथ उसका फॉर्म भर दिया तो फिर भले ही आपने एक दिन के बाद ही उस कोचिंग को छोड़ दिया हो, आपकी सफलता को भुनाने में वो कोचिंग पीछे नही रहेगा. कोचिंग कोई सेवा नही, शुद्ध व्यवसाय है मेरे भाई और ये व्यवसाय अभी करोडो का है. कोचिंग की फ़ीस को देखो तो 50000 से लेकर एक लाख या उससे भी ज्यादा चार्ज करने वाले कोचिंग आपको दिख जायेंगे.
    खैर, मूल प्रश्न पर वापस लौटे, ‘क्या कोचिंग किसी को आईएस बना सकते हैं?’ मेरा मानना है- नहीं. जब तक आपके अन्दर वो जज्बा और जूनून नही होगा तब तक कुछ नही हो सकता. और अगर कोई बन्दा आपने भाग्य के सहारे पूरी तरह कोचिंग के सहारे आईएस बन भी जाता है तो वो आपने करियर में क्या करेगा, राम जाने. आइयें, लगे हाथो कोचिंग के लाभ और घटे पर एक निष्पक्ष विश्लेषण कर ले-



    कोचिंग के लाभ-
    १. अगर विज्ञान विषयों का कोई छात्र किसी बिलकुल नए मानविकी विषय को अपनाता है तो प्राम्भ में कोचिंग उसे थोड़ी मदद पहुंचा सकते हैं.

    २. अगर किसी छात्र ने परीक्षा के बारे में जानने का अपना बेसिक होम वर्क पूरा नही किया है तो यह जानकारी उसे कोचिंग से मिल सकती है.

    ३. अगर छात्र किसी अन्तःप्रेरणा से नही बल्कि घर-समाज के दवाब में इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो कोचिंग इस परीक्षा के प्रति रुझान बनाने में उनकी मदद कर सकते हैं.

    ४. कोचिंग आपको एक ग्रुप से मिलाते हैं जो आपकी तरह ही आशंकाओं-आशाओं-निराशाओं के झूले में झूलता इस परीक्षा की तैयारी में लगा है.

    ५. कोचिंग कुछ रोमांटिक अभ्यर्थियों को लव stories बनाने के मौके भी देते हैं.

    कोचिंग के नुकासन -
    १. कोचिंग आपके अभिभावकों की जेब पर एक अच्छा-खासा बोझ डालते हैं. कोचिंग ज्यादातर दिल्ली या बड़े शरों में केन्द्रीत हैं सो छात्र दूर-दराज से दिल्ली में आकर छोटे-छोटे कमरों में अस्वास्थ्यकर जीवन बिताते हुए चिंता-तनाव-अवसाद की दुनिया में जीते हुए इसकी तैयारी करते हैं.

    २. कोचिंग आपको शॉर्ट-कट की आदत लगाते हैं, और याद रखे की यदि जिन्दगी में कुछ बड़ा करना है तो शॉर्ट-कट से बचते हुए आपने रस्ते खुद तैयार करने चाहिए.

    ३. UPSC अपनी तरफ से कोचिंग को बढ़ावा न देने के लिए हर संभव कदम उठती है. हर साल प्रश्नपत्रों की बदलती प्रकृति से आप देख सकते हैं की कोई भी कोचिंग इस बात का दावा नही कर सकती की क्या पूछ जा सकता है?

    ४. कोचिंग का एक सबसे बार घाटा है की एक जैसे नोट्स से सैकड़ो लड़के जब परीक्षा में लिखेंगे तो अनुभवी examinor उनके नंबर काटने में कोई हिचकिचाहट नही करते हैं.

    ५. कोचिंग आपको स्तरीय किताबों की जगह नोट्स पढने की आदत लगाते हैं, एक्साम की बदलती प्रकृति के मद्देनजर यह बात आपकी सफलता के लिए खतरनाक हो सकती है.

    अगर कोचिंग करनी ही पड़ जाये तो-

    १. कोचिंग के नोट्स पे पूरी तरह depend नहीं करे, उनको सहायक सामग्री की तरह इस्तेमाल करते हुए आपने विशिष्ट नोट्स तैयार करे.

    २. अपनी रचनात्मकता और विशिष्टता को कोचिंग की भीड़ में नही खोने दे.

    दोस्तों, मेरा सन्देश यही है की आप खुद पर भरोसा करे, Question Bank , Syllabus , library और स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं तथा किताबों को अपने अध्ययन की आधारशिला बनाये. कोचिंग करना, न करना आपकी पसंद, जरुरत और उनके बारे में आपकी राय पर निर्भर करता है. खुद पर और स्वाध्याय पर भरोसा करे. हमेशा याद रखे की-

    गगन को झुका के धरा के चरणों पर धर सकता है,
    इंसान ठान ले तो फिर क्या नहीं कर सकता है.

    -------------#shivu ------------@@@


    NOTE:-एक अफसर का नोट्स पढकर जानिए क्यों कोई सफल होता है तो क्यों कोई असफल?...नोट्स देखने के लिए यहां CLICK करें.

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