Thursday, 22 September 2016

सेलेक्शन के लिए सिर्फ पढ़ें नहीं, ऐसे बनाए रणनीति?

दोस्तों, सिविल सर्विसेज की तैयारी हर कोई करना चाहता है. लेकिन सिर्फ तैयारी ही अगर इस परीक्षा में सलेक्शन का मापदंड होता तो शायद ज्यादातर छात्र सेलेक्ट हो जाते. तो फिर सवाल उठता है कि सिविल सर्विसेज में सफल होेने के लिए क्या मापदंड होता है? सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की शुरुआत कैसे करें? क्या पढ़ें? कितना पढ़ें? कितने घंटे पढ़ें?...


ये वो सवाल हैं जो हर परीक्षार्थी के मन में उठता है. जो नया है उसके भी और पुराना है उसके भी मन में. दरअसल, सफलता का पैमान हर छात्र के लिए अलग-अलग है. कोई एक घंटे पढ़कर तीन घंटे की कसर पूरी कर लेता है तो कोई 18 घंटे पढ़कर 1 घंटे के बराबर पढ़ाई करता है. इसकी वजह है कि कोई छात्र किसी चीज को कैसे ग्रहण करता है? खासबात ये है कि अपनी जगह पर सही दोनों है, लेकिन फर्क है तो सिर्फ रणनीति का...


युद्ध में जीत उसी की होती है तो रणनीति बनाकर लड़ता है. महाभारत के अभिमन्यू की कहानी तो आपको याद होगी. अभिमन्यू अगर रणनीति बनाकर, सोच समझकर अपने से सीनियर्स से गाइडेंस लेकर चक्रव्यूह में घुसता तो वो जरुर सफल होता. लेकिन उसने अपने पास संचित ज्ञान को ही सबकुछ समझ लिया. और उसका नतीजा क्या हुआ वो बताने की जरुरत नहीं है...


IAS की परीक्षा हो या PCS की. दोनों ही परीक्षा आपके धैर्य के साथ-साथ सही रणनीति की परख करती है. इतिहास गवाह है कि इस परीक्षा में सफल होनेवाले ज्यादातर वही छात्र हैं जो रणनीति के तहत तैयारी के बाद परीक्षा हाल में पहुंचते हैं. नहीं तो ज्यादातर घुस तो जाते हैं लेकिन पेपर देखकर नील बटा सन्नाटा हो जाते हैं. ऐसे लोग परीक्षा हॉल से बाहर निकलने के बाद ये कहते मिल जाएंगे कि अगली बार तैयारी से देंगे तो 100 फीसदी सेलेक्शन होगा. लेकिन मजेदार बात ये है कि ये डॉयलाग वो हर बार परीक्षा हॉल से बाहर निकलकर देते हैं. और इससे भी मजेदार बात ये है कि ये डॉयलाग मारने वाले सबसे ज्यादा सीनियर्स होते हैं.

 

अगर आप भी UPPCS की तैयारी कर रहे हैं और उपरोक्त छात्रों की तरह हर बार यही कहते हैं कि अगली बार तैयारी से एक्जाम देंगे तो आपको रणनीति बदलने की जरुरत है. रणनीति बदलने में आपकी मदद भावना सिंह जी का एक लेख कर सकता है. जिसमें उन्होंने ना सिर्फ तैयारी की रणनीति बताई है बल्कि सफलता दिलाने वाली किताबों का नाम भी दिया है. आप इस आलेख को ना सिर्फ पढ़िए बल्कि अमल में भी लाइए. भावना जी का ये आलेख हम उनकी फेसबुक वॉल से साभार ले रहे हैं. 
भावन सिंह जी का लेख पढ़ने के लिए यहां पर CLICK करें.

छोटी-सी अपील-
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