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    Friday, 23 September 2016

    IAS की परीक्षा में कौन लोग असफल होते हैं और कौन सफल?

    दोस्तों, सिविल सर्विसेज परीक्षाओं की तैयारी का मूल मंत्र है हौसला. दुनिया का बड़े से बड़ा खिलाड़ी अगर हौसला हार जाए तो उसकी हार तय हैं. सवाल ये उठता है कि ये हौसला मिलेगा कैसे? एक प्रैक्टिकल बात आपको बताता हूं. तैयारी करनेवाला हर उम्मीदवार शुरु में बेहद उत्साहित होता है. उसे लगता है कि वो पहली बार में ही तंबू गाड़ देगा. पूरा सेलेबस चाट डालेगा. एक नई इबारत लिखेगा. वगैरह-वगैरह. लेकिन तैयारी के शुरुआती महीनों में ही उसका हौसला टूटने लगता है. इस हौसले को बनाए रखने का काम करते हैं प्रेरणादायी लोग और प्रेरणाप्रद लेख...

    ये लेख ना सिर्फ छात्रों को बूस्ट करते हैं बल्कि उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने की एनर्जी भी देते हैं. जब भी छात्र हौसला हारता है तो ये लेख और प्रेरणादायी लोग उन्हें उत्साहित करते हैं. यही काम कोचिंग सेंटर करते हैं. जो लोग कोचिंग कर चुके हैं उन्हें अच्छी तरह से पता है कि क्लास में टीचर अगर 60 मिनट पढ़ाता है तो कम से कम 30 मिनट छात्रों को अपनी कहानी या फिर सफल लोगों की कहानी सुनाता है. उनका मकसद साफ है. वो जानते हैं कि कोचिंग पढ़ने से किसी का सेलेक्शन नहीं होता है, सेलेक्शन तब होता है जब छात्र में लगातार सालभर पढ़ने का हौसला बना रहे. आपके हौसले को बनाए रखने के लिए नीचे हम शिवा ठाकुर शिवा सर का प्रेरणाप्रद आलेख दे रहे हैं. इस आलेख को पढ़कर आपको नई एनर्जी मिलेगी. ये लेख शिवा सर ने अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया है. साभार ये लेख हम पेश कर रहे हैं.

    छोटी-सी अपील-
    शिवा सर की मेहनत को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाए. नीचे फेसबुक शेयर के बटन को दबाएं...




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    शिवा सर का लेख जैसा उन्होंने फेसबुक पर शेयर किया.

    #I.a.s mission #2017 thank u sir ए. के. मिश्रा - - - @@
    अधिकांश छात्रों की यही मनोदशा है कि भारतीय सिविल सेवा परीक्षाओं में उत्तीर्ण होना साधारण व्यक्ति के वश की बात नहीं है और सिर्फ असाधारण बौद्धिक क्षमता वाले लोग ही इसमें सफल होते हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग भी इन परीक्षाओं में सफल होने लगे हैं जिन्होंने इस धारणा को तोड़ा है। अनुभव बताते हैं कि धैर्ये के साथ लगातार एक सुव्यवस्थिति तरीके से तैयारी करने वाले साधारण छात्र भी सिविल सेवा परीक्षाओं में उत्तीण हो सकते है। अभी तक एक सोच थी कि इन परीक्षाओं में अधिकांश बच्चे बड़े-बड़े अधिकारियों के ही उत्तीर्ण होते हैं। आज यह धरणा भी अब पूरी तरह से गलत साबित हो रही है। चूंकि यह परीक्षा हमारे देश के लिए बड़े अधिकारी वर्ग को पैदा करती है, इस लिए देश का हर युवा अपने दिल में यह अभिलाषा संजोकर चलता है कि वह भी भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण हो। अत: यह ध्यान देना आवश्यक है कि आखिर इसमें क्या जरूरी है तथा तैयारी करने के लिए क्या योजनाएं बनानी पड़ती हैं?
    भारतीय सिविल सेवा के लिए यदि धैर्य के साथ लगातार एक सुव्यवस्थित तरीके से तैयारी की जाए तो सफलता अवश्य ही मिलती हैं। इसके लिए एक सुव्यवस्थित तरीका अपनाना चाहिए। सिविल सेवा के मुख्य विषय हैं- सामान्य ज्ञान, प्रारंभिक परीक्षा, सामान्य अध्ययन, मुख्य परीक्षा, ऐच्छिक विषय। सामान्य ज्ञान की तैयारी का सबसे आसान तरीका है प्रमुख राजनीतिक-आर्थिक अखबारों व प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन करना। ये काफी लाभदायक सिद्ध होता है। साथ ही यदि सम-सामायिक घटनाओं पर नजर रखी जाए और कुछ प्रमुख आंकड़ों व आलेखों का संकलन करते रहे तो सामान्य ज्ञान में बढ़ावा होता हैं। इसके साथ ही साथ अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, टेक्नोलॉजी व राजनीति विज्ञान का अध्ययन बहुत ही फायदेमंद होता है.


    सामान्य अध्ययन, मुख्य परीक्षा- मुख्य परीक्षा के लिए सभी कठिन तथ्यों, फार्मूलों एवं चित्रों को एक अलग नोटबुक में संकलित करते रहे। इस परीक्षा में गहन अध्ययन की आवश्यकता होती हैं अत:गहन अध्ययन करे। किताबी भाषा रटने की बजाए खुद अपने शब्दों में अभिव्यक्त करने की आदत डाले। इस परीक्षा में भारतीय भाषा और अंग्रेजी का भी अध्ययन करना पड़ता है। भारतीय भाषा की तैयारी में पिछले दो-तीन सालों के प्रश्न-पत्रों का स्वरूप समझ लेना ही काफी लाभदायक है। जबकि रेन एंड मार्टिन की ग्रामर अंग्रेजी के लिए लाभदायक होती है। निबंधों की तैयारी लिखकर करनी चाहिए। अपना स्वयं का दृष्टिकोण बनाना चाहिए जो काफी प्रभावकारी होती है।
    इसी तरह ऐच्छिक विषय, प्रांरभिक परीक्षा के तहत समाज शास्त्र, भारतीय इतिहास, भौतिकी या कानून का अध्ययन जरूरी है। जबकि ऐच्छिक विषय, मुख्य परीक्षा में समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन, भौतिकी तथा गणित की विधिवत तैयारी आवश्यक हैं। लेकिन सबकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाती है क्योंकि अधिकांश लोग उसके लिए अपने आप को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाते अत: तैयारी छोड़ देते हैं। ऐसे में वे हारे बिना ही हार जाते हैं। दरअसल प्रारंभिक परीक्षा में प्रदर्शन तथा मुख्य परीक्षा की तैयारी के आधार पर अभ्यर्थियों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।


    1-वे अभ्यर्थी जो प्रांरभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति काफी आश्वस्त होंगे और उन्होंने मुख्य परीक्षा के काफी हिस्से की तैयारी कर रखी होगी।
    2-वे अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति आश्वस्त होंगे, लेकिन मुख्य परीक्षा की पूर्व तैयारी नहीं की होगी। किंतु प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी में लग गए होंगे।
    3-वे अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति आश्वस्त नहीं होंगे, इसलिए वे परिणाम को देख लेने के बाद ही मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करना चाहते होंगे। कहना न होगा कि पहली श्रेणी के अभ्यर्थियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होगी। दूसरी श्रेणी के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की तैयारी की दृष्टि से बहुत अच्छी स्थिति में नहीं होंगे, लेकिन परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर देने की वजह से ऐसी आशा की जा सकता है कि वे अंत तक अच्छी स्थिति में आ जाएंगे। जहां तक तीसरी श्रेणी के अभ्यर्थियों का प्रश्न है, उनकी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए कहा जा सकता है कि अभी भी देर नहीं हुई है, शुरूआत करें और तैयारी के लिए जी-जान से आगे बढ़ें। आपकी प्रारंभिक परीक्षा बेहतर हुई है या नहीं, आप इसमें सफल होंगे या नहीं, आपने पहले से मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रखी है या नहीं। इन सभी मामलों में मुख्य परीक्षा की तैयारी तुरंत प्रारंभ कर देनी चाहिए, क्योंकि आप को खोना कुछ नहीं, बस पाना ही पाना है। एक मिनट भी परिणाम की प्रतीक्षा या उसके बारे में चितिंत होने में बर्बाद न करें। इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है-'चिंतित होना बंद करें और काम करना शुरू करें'।
    प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच का अंतराल काफी महत्वपूर्ण होता है। इस अंतराल में अभ्यर्थी कई मन:स्थितियों से गुजरते हैं। कभी वे परिणाम को लेकर चिंतित होते हैं, तो कभी वे 'क्या करें, क्या न करें' के ऊहापोह में लगे रहते हैं। लेकिन स्वयं पर नियंत्रण रखते हुए इन स्थितियों को अपना बनाना होगा। कहा गया है, 'दो निरंतर युद्धों के बीच की तैयारी अवधि विजयश्री को सुनिश्चत करने में प्राय:सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक होती है'। जो अपने हौसले को उच्च स्तर पर बनाए रखता है तथा सकारात्मक मन:स्थिति को संपोषित करने में सक्षम होता है। वही विजेता बनकर उभरता है।


    कोई भी युद्ध तभी जीता जा सकता है जब उसके लिए पहले ही एक फुलप्रूफ योजना बनाई जाए और उस योजना के तहत तैयारी की जाए। बिना योजना बनाए युद्ध लड़ना पराजय को ही आमंत्रित करना होता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में हर योद्धा दिशाहीन लड़ाई लड़ेगा, आक्रमण जिधर करना चाहिए उधर नहीं होगा, अंधेरे में तीर चलेंगे, परिणाम तो शून्य होगा ही। सिविल सेवा परीक्षा का युद्ध तीन स्तरों 'प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार' पर लड़ा जाता है, जिनमें से मुख्य परीक्षा काफी अहम है। ऐसा इसलिए कि इसमें प्राप्त होने वाले अंक ही आप को इस सेवा में जाने की गारंटी देते हैं। अत: युद्ध के इस स्तर को लड़ने के लिए पूर्व तैयारी करना आवश्यक है।
    लेकिन मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करने के पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि इस परीक्षा की प्रकृति कैसी है और आयोग इस परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों में किन गुणों की खोज करना चाहता है? साथ ही, यह भी जानना जरूरी है कि मुख्य परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा से कैसे भिन्न है? ताकि स्पष्ट रूप से ज्ञात हो सके कि मुख्य परीक्षा में करना क्या है.

    मुख्य परीक्षा परिमाणात्मक एवं गुणात्मक रूप से प्रारंभिक परीक्षा से भिन्न होती है। मुख्य परीक्षा में सही विकल्प का चुनाव करने और उसे ओएमआर पत्रक में चिह्नित करने के बजाए शब्द सीमा एवं समय सीमा का ध्यान रखते हुए विस्तृत व व्यापक अध्ययन के विपरीत मुख्य परीक्षा के लिए चयनात्मक, गहन एवं विशेषणात्मक अध्ययन की जरूरत होती है। जहां प्रारंभिक परीक्षा बहुत सारे तथ्यों, चित्रों और सूचनाओं को स्मरण रखने की अपेक्षा करती है, वहीं इनके अलावा मुख्य परीक्षा अभ्यर्थी से पढ़ी गई सामग्री को सुव्यवस्थित करने, उसका विश्लेषण करने तथा अभ्यर्थी को अपनी विचारधारा को विकसित करने की अपेक्षा रखती है। इससे तैयारी में एक गुणात्मक अंतर पैदा हो जाता है। अत: उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा की तैयारी पूर्णत: नए तथा नियोजित एवं वैज्ञानिक तरीके से करनी चाहिए, जो पूर्ण रूप से परीक्षा की मांग के अनुरूप हो।
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