Tuesday, 19 December 2017

CSAT के बाद हिन्दी मीडियम के छात्र क्यों नहीं बन पा रहे IAS? विश्लेषण

    UPSC की सिविल सर्विसेज परीक्षा में जब से CSAT लागू हुआ है हिन्दी मीडियम के छात्रों के कामयाबी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ये सोचने वाली बात है कि ऐसा क्यों है? आखिर क्यों CSAT से पहले हिन्दी मीडियम के छात्रा ज्यादा सेलेक्ट होते थे और सी-सैट के बाद से उनकी कामयाबी का ग्राफ लगातार गिरता ही जा रहा है। आइए इसके पीछे के कुछ कारणों का बिन्दुवार विश्लेषण करते हैं।

    1-प्रारंभिक परीक्षा से विषय का हटना:-

    सी-सैट से पहले प्रारंभिक परीक्षा में एक वैकल्पिक विषय और सामान्य अध्ययन का पेपर होता था। हिन्दी मीडियम के छात्र वैकल्पिक विषय में अच्छा नंबर पा जाते थे और प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट में स्थान बना लेते थे। हालाकि वैकल्पिक विषय को लेकर स्केलिंग पद्धति हमेशा एक अबूझ पहेली थी, जिसकी वजह से हिन्दी मीडियम के छात्र भी विषय को हटाने की मांग करते थे। लेकिन सी-सैट लागू होने के बाद हिन्दी मीडियम के छात्रों को ये दांव उल्टा पड़ गया।   

    2-मुख्य परीक्षा से दो विषयों का हटना-

    जैसा कि आपको पता होगा कि जब से सी-सैट लागू हुआ तभी से मुख्य परीक्षा से दो विषयों को हटाकर एक विषय कर दिया गया है। पहले दो विषयों में हिन्दी मीडियम के छात्र अच्छा नंबर खींच लेते थे। उन्हें स्केलिंग का भी फायदा मिल जाता था। जिससे उन्हें इंटरव्यू देने का मौका मिल जाता था। विषय होने से हिन्दी मीडियम के छात्रों को एक फायदा ये भी था उन्हें पेपर की भाषा अासानी से समझ में आज जाती थी क्योंकि पेपर की भाषा उतनी कठिन नहीं थी जितनी आज के सामान्य अध्ययन के पेपरों की होती है। लिहाजा पेपर को आसानी से समझकर उसका उत्तर लिखा जा सकता था।


    3-हिन्दी मीडियम में सामान्य अध्ययन की अच्छी कोचिगों का आभाव-

    दिल्ली की मुखर्जीनगर को IAS के हिन्दी मीडियम छात्रों का मक्का माना जाता रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। मुखर्जीनगर हिन्दी मीडियम के छात्रों का गढ़ भी इसलिए बन पाया था क्योंकि यहां पर विषय के अच्छे टीचर थे। विषय के अच्छे टीचरों की वजह से ही मुखर्जीनगर में छात्रों का जमावड़ा हुआ। लेकिन सी-सैट के बाद ये टीचर खुद को नए सैलेबस के अनुसार ढाल नहीं पाए। आप माने या माने लेकिन ये सच है कि सामन्य अध्ययन के सारे पेपरों के लिए जितनी अच्छी किताबें और टीचर अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध है उतने हिन्दी में नहीं है। और दुर्भाग्य ये है कि मुखर्जीनगर में जो टीचर हैं वो सब विषय के विशेषज्ञ रहे हैं ना कि सामान्य अध्यन के। इस वजह से सी-सैट लागू होने के बाद ये सारे विषय विशेषज्ञ पैदल हो गए। अब ये टीचर सिर्फ छात्रों को ठगकर पैसा कमा रहे हैं। असलियत ये है कि इन्हें अगर IAS के सामान्य अध्ययन का कोई भी पेपर सॉल्व करने के लिए दे दीजिए इनके हाथ-पांव फूल जाते हैं।

    हिन्दी मीडियम के छात्रों की कठिनाइयों पर हम आगे भी बात करेंगे। उसका निदान भी बताएंगे। फिलहाल आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप 2016 में आईएएस में सलेक्ट अनीता यादव की कॉपी देख सकते हैं। अनीता ने कॉपी Vision ias कोचिंग में टेस्ट सीरिज लिखने दौरान लिखी थी। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं IAS की मुख्य परीक्षा में हिन्दी मीडियम के छात्रों की कॉपी किस लेवल की होनी चाहिए। 


    दोस्तों अगर आपको हमरा ये विश्लेषण पसंद आया हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर का बटन दबाएं। ताकि हिन्दी मीडियम के छात्रों तक ये मैसेज जाए और उनके सामने आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई जाए।


    ANITA YADAV RANK-350, 2016 (HINDI MEDIUM)


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